वासना कि ईंटों से वैश्या का घर भी बनता है और साध्वी का मंदिर भी।

17 ज्ञान की बातें जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी।

 

  1. ज्यादा सोचने वाला अक्सर मुश्किल में पड़ जाता है।

  2. सच को समझ लेना और जान लेना ही धार्मिक होने की परिभाषा है।

  3. सोचने वाले हमेशा मुश्किल में पड़ जाते हैं।

  4. चित के नियम सब के एक सामान हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, तृष्णा, अहंकार, और ईर्ष्या सब को एक सामान घायल करते हैं।

  5. हमारे पाओं के नीचे न जाने कितने मर चुके लोगों की लाशें हैं पर फिर भी आखिर हमें क्यों नहीं समझ आती की सच क्या है और झूठ क्या है।

  6. बाहर होना ही दुःख है, पीड़ा है, कलेश है।

  7. एक आदमी सब आदमिओं की कथा है।

  8. हर आदमी सोचता है कि मैं सब से अलग हूँ। मुझे दुःख और मौत कभी नहीं आएगी।

  9. हम इंसान भी क्या दोगलापन करते हैं। युद्ध से अगर कोई भाग जाए तो हम उसे कायर कहते हैं। ज़िन्दगी के युद्ध से जो भाग जाए उसे हम महात्मा कि उपाधि दे डालते हैं।

  10. वासना के जगत मैं इतना जी लो कि वासना कि गहराई का तुम्हें भरपूर ज्ञान हो जाए।

  11. वासना कि कठिनाइओं मैं से गुजर कर ही इंसान कुंदन बनता है। वासना को सहज, स्वाभाविक, और सरल तरीके से निकल जाने दो। वासना से भागो मत बल्कि उसे अपना कर उसे समझने कि कोशिश करो।

  12. वासना कि ईंटों से वैश्या का घर भी बनता है और साध्वी का मंदिर भी।

  13. 42 साल के बाद इंसान कि समस्या जीवन कि नहीं बल्कि धर्म कि होती है। तब समस्या मनोवैज्ञानिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक होती है।

  14. वासना के फल पहले मीठे लगते हैं फिर बाद मैं कड़वे हो जाते हैं।

  15. वासना के काँटों कि चुभन को भी महसूस करो। चुभन को जो दबाने कि कोशिश करते हैं वही लोग पाखंडी और अपराधी बन जाते हैं। चुभन को महसूस करने वाले ज्ञानी या श्रेष्ठ लोग बन जाते हैं।

  16. स्वतन्त्र जिस का चित नहीं, सत्य उसका मित्र नहीं।

  17. धर्म के झूठे और आधाररहित डर ने हमारे चित को रुग्ण, कमजोर, और शक्तिहीन बना दिया है। हमारे धर्म, मान्यताएँ, पूजा, प्रार्थना, और उसूल सब धर्म के झूठे डर की आधारशिला पर खड़े हैं।

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