मोदी की जीत का रथ…

और इसी के साथ BJP  एक बार फिर जीत गयी! गुजरात हो या हिमाचल प्रदेश नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया की उनके मुक़ाबले का कोई तोड़ नहीं है और न ही कहीं दूर दूर तक नज़र आ रहा है। इसे मोदी जी का जादू कहें या मोदी factor, इसे मोदी जी की लोकप्रियता कहें या मोदी की आवाज का आक्रषण, पर एक बात तो पक्की है की मोदी की जीत का रथ अब थामे नहीं थम रहा। मोदी की लोकप्रियता का रथ अपने रास्ते में आयी हर रुकावट और मुसीबत को तहस नहस करने की हिम्मत रखता है, वह यह नहीं देखता कि सच क्या है झूठ क्या, नैतिक क्या अनैतिक क्या, धर्म क्या और जाती क्या, गरीब क्या अमीर क्या, न्याय क्या अन्याय क्या, आदमी क्या (मनमोहन सिंह) और पार्टी क्या (कांग्रेस)।

हाल ही मिली जीत से यह निश्चित हो जाता है कि कांग्रेस को अभी भी बहुत मेहनत करनी है, बहुत सी कमजोरिओं को दूर करना है, और अपनी राजनैतिक strategy को भी बदलना  है।  मणिशंकर अय्यर का प्रधानमन्त्री पर किया ब्यान कांग्रेस को महंगा पड़ ही गया, क्या पता अगर वो यह बयानबाजी  न करते तो बीजेपी हार जाती मगर अब जो होना था वह हो गया है। अब कुछ नहीं बदला जा सकता। अगर बदला जा सकता है तो वो है कांग्रेस की आने वाले चुनावों में अपनी  रणनीति की, अपने काम करने के ढंग को, अपने  मंत्रियों के आम जनता के प्रति व्यवहार को, और देश के प्रति उसके स्पष्ट और मजबूत एजेंडा को।

अगर कहीं ऐसा हो गया की बीजेपी पूरे भारत में अपना भरपूर कब्ज़ा जमाने में कामयाब हो गयी तो वह दिन दूर नहीं जब यही पार्टी अपने अहंकार में मस्त होकर देश या देशवासिओं के लिए विनाश और तबाही का कारण बन सकती है जैसा की हाल ही में देखने को मिला है। राजस्थान की रोंगटे खड़ी कर देने वाली  घटना अभी भी मानस पटन पर स्पष्ट तस्वीर की तरह अंकित है जब एक गरीब और मासूम से दिखने वाले 45  साल के मोहम्मद  अफ़राज़ुल,जो की  एक daily wager  था, को एक नफरत और द्वेष से भरे इंसान ने उसे कुल्हाड़ी से काट कर और बाद में तेल  फैंक कर बुरी तरह से जला डाला, वह घटना अभी भी आत्मा को झकझोर कर के रख देती है जब पहलु खान को गौ-रक्षकों ने बुरी तरह पीट पीट कर माल डाला था, और न जाने कितने ही ऐसे और भी भारतीय थे जिनको धर्म के नाम पर अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। क्या यही भारतीय लोकतंत्र की खासियत है की कैसे एक धर्म या एक तबके या एक पार्टी या एक जाती को प्राथमिकता दी जाए? क्या यही वह बाबा आंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान की महानता है की कैसे गरीब, बेसहारा, दबे हुए, निचले आर्थिक स्तर के या किसी ख़ास धर्म के लोगों के साथ नाइंसाफी या अत्याचार किया जाए?  क्या यही वह भारतीय लोकतंत्र के द्वारा चुनी गयी सरकार है जिस के राज में आये दिन कोई न कोई भारतीय जाती-पाती, राजनीति, और धर्म की प्रचंड आग में फूंक दिया जाता है? मैं सलाम करता हूँ उन बहादुर भारतीयों को जिनमे प्रमुख हैं नरेंद्र डाभोलकर, एम एम कल्बुर्जी, गोविन्द पंसारे, संदीप कोठारी, राजदेव रंजन, संतानु भौमिक, राजेश वर्मा, गौरी लंकेश जिन्होने अपनी जान की कुर्बानी तो दे दी मगर सच, न्याय, और ईमान का साथ कभी नहीं छोड़ा।

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