महान कहावतें जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी

  • सांझे परिवार में सुख ज्यादा और दुःख कम होते हैं। सांझे परिवार में दुःख आने पर दुःख बंट जाया करता है और उसका हल बड़ी आसानी से निकल आया करता है।

  • इन बातों से तोबा कर लें तो आप दुखों की पीड़ा से बच जाएंगे – निंदा-चुगल खोरी करना, शराब पीने की आदत, पराई स्त्री का संग, और आलस्य।

  • सीधी सादी ज़िन्दगी जियो ओर बिना किसी दबाब, परेशानी, या आर्थिक ओर शारीरिक नुक्सान से दूर रहो।

  • बुढ़ापे के साधन अपनी भरपूर जवानी में ही जुटा लेने चाहिए। बुढ़ापे में साधन जुटाते रहोगे या अपनी सेहत का भी ध्यान रखोगे। आज की योश मारती जवानी के पल भर के आनंद के लिए अपना आने वाला बुढ़ापा मत खराब करो। बुढ़ापा उन्हीं का सफल ओर तकलीफ से परे है जिन्होने अपनी जवानी में खूब मेहनत की हो।

  • ज्यादा चुप रहना, ज्यादा बोलना, ओर ज्यादा काम करना भी कभी कभी हानिकारक बन जाता है।

  • जिस इंसान को माँग कर खाने की आदत पड़ जाती है वह मेहनत कर के कमाना ओर खाना भूल जाता है। ऐसे ही लोग बाद में अपनों या बेगानो पर बोझ बन जाया करते हैं ओर उनके तिरस्कार का सामना करते हैं।

  • न पानी ज्यादा खर्च करने में समझदारी है न ही ज्यादा मेहनत से कमाया हुआ पैसा। अगर हम पानी ओर पैसे का सही तरह से प्रयोग नहीं करेंगे तो एक दिन ऐसा भी आता है जब न पानी हाथ में होगा न ही पैसा।

  • अच्छे कर्मों का एक महान फायदा यह है की हमारा दिल ओर हमारी आत्मा किसी बोझ से दबी नहीं होती। हमारे अंदर एक आनंदमयी तसल्ली बानी रहती है कि हमने अच्छा काम किया है।

  • खाते खाते कुआँ खाली हो जाता है। जितना मर्जी पैसा हो मगर उसे अगर बेतरतीब तरीके से खर्च करने लगें तो वह भी ख़तम हो जाता है।

  • अकल्मन्द को इशारा ही काफी है।

  • आग लग जाने पर मशक (पानी से भरी बाल्टी) का भाव नहीं पुछा जाता। इसे ऐसे भी कह सकते हैं की जब कड़ाके की सर्दी पड़ रही हो तो कपड़ों का भाव नहीं पुछा जाता।

  • घर से खाकर निकलो तो ही समाज खाने के लिए पूछता है।

  • ऊंचा बोलने से आपका कहा सच नहीं हो जाता है।

  • संसार इंसान को नहीं उसके महान कर्मों और महान बोलों को याद रखता है।

  • जिस तन लागे  सो तन जाने। जिसे लगती है वही जानता है कि उसका दर्द कितना है।

  • जिस तरह कीड़ा आहिस्ता आहिस्ता कपडा कुतर देता है उसी तरह ईर्ष्या इंसान को कुतर देती है। इसलिए दूसरों की खुशियां देख कर जलो मत।

  • जैसे जैसे पैसा बढ़ता जाता है वैसे वैसे मित्र कम होते जाते हैं। कम पैसे कम मित्र, ज्यादा पैसे   ज्यादा मित्र।

  • जीवन गुजारो तो एक नन्हे बच्चे की तरह, बिना कुछ याद रखे हुए, बिना किसी के लिए नफरत रखे हुए।

  • मेहनत ही स्वर्ग है और आलस्य ही  नरक।

  • संसारी लोग अपने मतलब की बात झट से पकड़ लेते हैं।

  • दुनिया चिढ़ते को चढाती है। जो जितना चिढ़ता है दुनिया उसे उतना ज्यादा चिढ़ाती है।

  • पक्षी सुबह होते ही काम पर चले जाते हैं तभी खुश रहते हैं। काम में व्यस्त रहना ही इंसान की ख़ुशी का कारण है। बेकार बैठना दुखों को निमंत्रण देता है।

  • आईना सजाने से आपकी शकल नहीं संवर जाती। आइना कभी झूठ नहीं बोलता।

  • जो ज़िन्दगी के संघर्ष का खेल खेलता ही नहीं वह क्या हारेगा। हारता तो वह है जो खेलता है। जो नहीं खेलता वह तो चलते फिरते  मुर्दे के सामान है – न हार का पता न जीत का, न ख़ुशी का पता न गम का।

  • देखा जाए तो इंसान भी एक छोटे बच्चे की तरह है, एक चीज़ पाकर दूसरी  को हासिल करने के लिए ज़िद्दी हो जाता है और पूरी उम्र रोता बिलखता रहता है।

  • बैठने से चलना अच्छा है। कम से कम शरीर तो तंदुरस्त रहेगा।

  • जिस इंसान में अहंकार की हवा ज्यादा भरने लग जाए तो वह कभी भी फट सकता है।

  • पैसा न होना उतना दुखद और लाचारी भरा नहीं है जितना दुखद और  लाचारी ज्ञान होने पर भी आप पैसा न कमा पायें।

  • धरती के स्वर्ग को छोड़कर जो लोग आसमां के स्वर्ग की कल्पना  में ही डूबे रहते हैं उन्हें न तो धरती का स्वर्ग नसीब होता है और न ही आसमां का।

  • कर्ज़ा लिए हुए लोग हर सुबह उठने पर अपने आपको हारा और दबा हुआ महसूस करते हैं।

  • हर बात के पीछे, हर घटना के पीछे, हर भावना के पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। उस कारण या वजह को जानने की कोशिश करनी चाहिए।

  • मुफ्त में आजकल कोई सलाह भी नहीं देता खाना खिलाना  तो बहुत दूर है। इसलिए मुफ्तखोरी की आदत से जितना हो सके बच लो नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं।

  • कम बोलोगे तो ज्यादा समझ आएगी। ज्यादा बोलोगे तो कम समझ आएगी। उतना ही बोलो जितना बोलने की जरुरत है। ज्यादा बोलना हमेशा हानिकारक सिद्ध होता है।

  • गाडी बिना लगे और किसी का नुक्सान हुए बिना वही टाइम पर पहुँचती है जिसका ड्राइवर समझदार हो। बाग़ के फूल उसी के सुन्दर, खुशबूदार, और अच्छे होते हैं जिसका माली समझदार और मेहनती हो। परिवार उसी का खुश, सफल, और आदरनिये बनता है जिसका मुखिया समझदार और काबिल हो।

  • जिस घर में नफरत, हिंसा, झूठ, और अज्ञान का वातावरण हो वहाँ के बच्चे कैसे खुश, सफल, और महान नागरिक बन सकते हैं।

  • जिसका अपना पेट ही कुँए की तरह गहरा होगा वह आखिर किसी की क्या मदद करेगा। वह तो सिर्फ अपना ही पेट भरता नज़र आएगा।

  • नौकर चोरी कर ले तो माफ़ या सजा देकर रफा दफा  किया जा सकता है। मगर जहाँ मालिक ही चोरी करने लग जाए तो क्या किया जाए? जहां सरकार ही चोर या कातिल बन जाए तो वहां क्या किया जाए।

  • जो लोग विवाद को संवाद से दूर नहीं करना जानते वह या तो कोट पैंट पहने हुए गंवार  हैं या तो जंगल  में विचरते जानवर।

  • जो मेहनती होता है वह सुबह  दूकान खोलता है और  अक्सर ज्यादा कमाता है।

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