एक सच्ची कहानी जिसे आप पढ़े बिना नहीं रह सकते।

कहानी जो आपको प्रेरित कर देगी…

दोस्तों आज मैं आपके साथ एक  ऐसी बात share  करना चाहता हूँ  जिससे आपका मनोबल तो बढ़ेगा ही साथ में आप का जो negative self है वह भी positive हो जाएगा और आप हर दिन सफलता की सीढ़ीओं पर निरंतर चढ़ते जाएंगे। हर कोई कोशिश करता है की उसकी नौकरी लगे पर अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब भी हम कोई काम शुरू करते हैं तो हमारा अहंकार(ego) हमें रोकना शुरू कर देता है और न जाने कहाँ कहाँ से बातें लेकर आता है और हमें  यह convince  करने कि कोशिश करता है कि जो काम हम कर रहे हैं वह करने से समाज में  हमारी image और respect कम हो जायगी, लोग क्या सोचेंगे कि हम क्या काम कर रहे हैं, हमारे माता पिता क्या सोचेंगे कि उन्होने हमें इसलिए पढ़ाया था कि हम इसी काम के काबिल रह गए थे, और ऐसे ही मन को नीचा करने वाले कई विचार हमारे दिमाग में घूमते रहते हैं। यह सारी negativity की हवा हमारी ego  हमारे मन में फैलाती रहती है ताकि हम कोई भी काम न कर सकें, ताकि हम अपने negative self की चपेट में आ जाएँ और जीवन में पिछढ़ जाएँ। हमारे कई नौजवान ऐसे हैं जिन्हें हम रोज देखते हैं जो इस negative  feeling  का शिकार हो चुके हैं और आज अपने फैसलों पर बहुत पछता रहे हैं।

ऐसा ही एक बार हुआ की 3 भाईओं को PHE department के किसी  बड़े इंजीनियर ने सिफारिश करके नौकरी में रख लिया। वो तीनों भाई (जिनमें से एक उम्र में छोटा था और  काफी सीधा सादा भी था) नौकरी पाकर बड़े खुश हुए और उनका परिवार उनकी नौकरी की खबर से बड़ा खुश हुआ, उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना न रहा, पूरे मोहल्ले में उन्होने मिठाई बांटी। मोहल्ले के सब लोगों ने उनको मुबारख बात दी। नौकरी join करते ही वे तीनों भाई तन मन से अपना काम करते रहे पर जैसे ही  तीन चार दिन  बीते और उन्हें पानी की pipes को जमीन के अंदर fit करने के लिए कहा गया तो एक छोटे भाई को छोड़कर बाकी दोनों ने आना कानि शुरू कर दी। जो भाई सीधा सादा था, जिसके अंदर चालाकी और मक्कारी नहीं थी, वह चुपचाप अपना काम करता रहा बिना यह सोचे की उसे गड्डा खोदना है और मिटटी से अपने कपड़े गंदे करने हैं। दूसरे दो भाईओं के अंदर यह विचार आ गया कि उनका अपना समाज में एक standard  हैं, image  है, respect  है, वो क्यों भला ऐसा काम करें जिसमे उन्हें बेलचा उठा कर लोगों के सामने खुदाई करनी पड़े। उनके अंदर अपने काम को लेकर शर्म आने लगी, उन्हें ऐसा लगा कि उनका काम बहुत छोटा है और ऐसा काम करने से उनका समाज में रुतबा कम होता है।

दूसरी तरफ देखा जाए तो पता चलता है कि उनका तीसरा भाई जो बिलकुल शरीफ और सीधा सादा था और जिसे सारे पागल और निठल्लू  कहते थे वह बिना फ़ालतू की बातों में पड़े अपने काम की तरफ ध्यान देता रहा और उसके अंदर कभी यह सोच नहीं आयी की उसका काम छोटा है या बड़ा उसे तो बस इतना पता था की काम तो काम होता है – न छोटा न बड़ा; रोजी तो रोजी होती  है – न छोटी न बड़ी।  जब बड़े भाईओं को बार बार गड्डे खोदने का काम मिलता रहा तो एक दिन ऐसा भी आया की उन्होने अपनी नौकरी को ही लात मार दी और घर में ही बैठने लगे, जो भी छोटा मोटा काम मिलता वह कर लेते पर फिर से वह PHE  की नौकरी नहीं join  की। छोटा भाई बड़ी लगन से काम करता रहा बिना कोई शर्म किये और एक दिन ऐसा भी आया जब वह contractual  worker  say एक permanent  government  employee  बन गया। अब उसे खड्डे भी नहीं खोदने पड़ते थे, पहले की मेहनत अब बहुत कम हो गयी थी और साथ में तन्खा भी काफी बढ़ गयी थी। नौकरी पक्की होनी पर उसके पिता ने उसकी शादी करवा दी और आज के time  वह छोटा भाई अपने परिवार के साथ बहुत खुश है, उसका एक बहुत बड़ा परिवार बन चुका है (2  लड़किया और एक बेटा) और सारे बच्चे well  settled  हैं। बाकी दो बड़े भाई जिन्होंने अपनी नौकरी को लात मारा था बेशक शादी उनकी भी हो गयी है पर अपने छोटे भाई के मुकाबले उनकी ज़िन्दगी उतनी सफल और आरामदायक नहीं है जितनी की उनके छोटे भाई की। पैसा तो वो कमा रहे हैं पर उतना नहीं जितना उनका छोटा भाई  और उन्हें मालूम है कि  जितनी मेहनत उन्हें अब करनी पड़ रही है उतनी मेहनत उस वक़्त नहीं करनी पड़ी थी जब उन्होंने अपनी नौकरी को लात मारा था।

तो दोस्तों देखा आपने कैसे एक भाई जिसे सारे सीधा सादा और निठल्लू समझते थे अपने दो चालाक भाईओं के मुकाबले कैसे आगे बढ़ गया और सफलता कि राह पर निरंतर चलता रहा और वह भी बिना रुके। इसका क्या कारण था? कारण सिर्फ एक ही था और वह है कि छोटे भाई ने कभी भी अहंकार को अपनी सफलता या अपने काम के रास्ते में नहीं आने दिया, वह चुप चाप अपना काम करता रहा, मेहनत करता रहा और हर दिन अपने लक्ष्य कि तरफ बढ़ता रहा। दूसरी तरफ बड़े भाई अपने ही अहंकार का शिकार हो गए और पूरी उम्र बस यही सोचते रहे कि वह जो भी काम करेंगे अपने standard  का करेंगे। और आज पता चल रहा है कि उनका standard  क्या है।

दोस्तों वह छोटा भाई मेरे दोस्त के पिता जी हैं जो आज बहुत सफल और खुश हैं। उनका बेटा भी आगे बहुत मेहनती निकला जिसका आज mobile phones का अपना शोरूम है। समाज में इनकी आज बहुत इज्जत है। यह दोस्त मेरे लिए एक प्रेरणा भी है।

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