शरीफ और इज़्ज़तदार कौन!

एक शरीफ और इज़्ज़तदार इंसान की पहचान क्या है? क्या वो इंसान शरीफ और इज़्ज़तदार है जिसके साथ हर कोई बदसलूकी से पेश आ रहा है और वो चुपचाप अपनी बेइजत्ती बर्दाश्त करी जा रहा है? वो चुपचाप इधर उधर बगले झाँक रहा है?

क्या इज़्ज़तदार और शरीफ वो लोग होते हैं जिनके साथ बड़े बड़े ऑफिसर्स या नेता लोग बड़ी बुरी तरह पेश आते हैं ओर उनकी इज़्ज़त की धज़्ज़िआं उड़ा जाते हैं ओर वो अपने विरोध में एक शब्द भी नहीं कह पाते?

क्या इज़्ज़तदार ओर शरीफ वो होते हैं जो कभी भी अपने विरोध में कहे जा रहे ज़हर से भरे शब्दों को कायरों की तरह पी जाया करते हैं? लोग उनके मुहं पर उनकी बेइज़्ज़ती कर जाते हैं ओर वो कुछ नहीं कह पाते?

क्या इज़्ज़तदार और शरीफ वो लोग होते हैं जो अपने आस पास हो रहे पाप, शोषण, अन्याय और दुराचार को लेकर बिलकुल अनजान हो जाते हैं और ऐसा दिखाते हैं मानो की उन्हें मालुम ही नहीं कि आखिर क्या हुआ?

क्या इज़्ज़तदार और शरीफ वो लोग होते हैं जिनके साथ हर कोई ऊंची आवाज और दानवी तरीके से बात कर सकता है और वो डर की चादर लपेट कर विरोध में कुछ नहीं बोल पाते?

क्या इज़्ज़तदार और शरीफ वो होते हैं जो समझते हैं कि उनके साथ सब कुछ ठीक हो रहा है ओर वो क्यों दुनिया के झंझट में पड़े? वो क्यों किसी का पक्ष लेकर उसके हक़ या इन्साफ के लिए आवाज उठाएं? क्यों किसी का साथ दें? क्यों अपने सर मुसीबत मोल लें?

क्या इज़्ज़तदार ओर शरीफ वो होते हैं जिन्हें सिर्फ यही मालुम है कि कैसे कायरों ओर मूर्खों कि तरह बंद कमरों में रहा जाए ओर अपने आप को हमेशा समाज के द्वारा खोखले ओर झूठे आदर्शों ओर उसूलों कि पदवी से सम्मानित होते हुए देखें?

क्या इज़्ज़तदार होने का मतलब यही रह गया है कि चुपचाप अपने ज़मीर, अपनी पत् ओर अपनी इज़्ज़त को समाज द्वारा बेदर्दी से कुचलने दें? अपने पक्ष में कुछ भी न बोलें?

क्या इज़्ज़तदार ओर शरीफ वो कहलाते हैं जो अपने देश, अपनी कोम, अपने परिवार, अपने भाई बंधुओं के साथ हो रहे अन्याय ओर शोषण के खिलाफ बिलकुल भी आवाज न उठाएं बल्कि चुपचाप उन्हें तबाह ओर ख़तम होते हुए देखते जाएँ?

क्या इज़्ज़तदार ओर शरीफ वो होते हैं जो सिर्फ अच्छे विचार, अच्छे लोग, अच्छे भाषण ओर अच्छे वस्त्रों को धारण करते हैं ओर जैसे ही कोई कतल, शोषण, बलात्कार, एक्सीडेंट, हिंसा ओर मारधाड़ की बात आती है तो नामर्दानगी का कम्बल ओढ़ कर सो जाते हैं मानो की उनके साथ ये कुछ कभी नहीं होगा? मानो कि वो हमेशा गुलाबों से गिरे रहेंगे?

क्या इज़्ज़तदार ओर शरीफ वो लोग होते हैं जो किसी सड़क हादसे में घायल इंसान को शरेआम बेशर्मों ओर कायरों की तरह अनदेखा कर के निकल जाएँ? क्या वो खुद या उनके जान पहचान के कभी इस एक्सीडेंट का शिकार नहीं होंगे?

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