विनाश काले विपरीत बुद्धि! फंस गए बाबा राम रहीम जी!

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बड़े अफ़सोस और शर्म के साथ कहना पड़ रहा है कि बाबा गुरमीत राम रहीमजो 60 million अंध भक्तों के बाबा होने का दावा करते हैं, बलात्कार और योन शोषण के आरोप मैं दोषी करार दिए जा चुके हैं। और जैसे ही पंचकूला हाई कोर्ट का फैसला आया कि बाबा बलात्कार के केस में दोषी हैं, उनके भोले भाले और अंध भक्त मानो पागल से हो गए। वो बाबा के  दोषी करार दिए जाने से बेहद गुस्से और आक्रोश मैं गए। उन्हें ऐसा लगा मानो कि उनकी दुनिया लुट चुकी हो। मानो उनकी अस्मत लूट लई गयी हो। मानो  उनके धरती के  भगवान् की मूर्ती टूट चुकी हो और उस मूर्ती को फिर से जोड़ना उन्हें बेहद मुश्किल लग रहा था। और जब बाबा की बेइजत्ती के दुखों का घड़ा भर गया वो अपने आप को काबू मैं रख पाए और जंगली सांडों और बेकाबू हाथिओं की तरह उन्होंने  मारधाड़, आगजनि, गाडिओं को तोडना और गाडिओं को फूंकना शुरू कर दिया। जहाँ जहाँ भी नजर जाती वहां वहां बाबा के अंधे भक्त लाठिओं और तेज़ धार हथियार लेकर खड़े नजर आते। जहां तहाँ news media  की OB Vans नजर आयी वो बड़ी बेदर्दी और आक्रोशक अंदाज़ में फूंक डाली गयी। और तो और जब  आगजनी और मारधाड़ से गुस्सैल भीड़ या लाखों में मौजूद बाबा के अंधश्रद्धा में डूबे हुए भक्तों को तसल्ली नहीं हुई तो इन्होंने सड़कों या government  parks  के आसपास खड़े गरीब लोगों की रोजी रोटी कमाने के खोखे भी भयानक तरीके से फूंक डाले।  जहाँ तक कि Fire  Brigades कि गाडिओं को भी नहीं बक्शा गया।

 

क्या यही बाबा के भक्तों ने उनके पास रह कर सीखा है कि कैसे गुंडों कि तरह उपद्रव और पथराव किया जाता है? की कैसे गुंडों की तरह गाडिओं और गरीब के खोखों में आग लगाई जाती है? की कैसे अदालत के फैसले का सम्मान करने के बजाय सड़कों पर उतरा जाता है और गुंडों की तरह आक्रोश प्रदशन किया जाता है और आम जनता के दैनिक जीवन को बेहाल किया जाता  है? क्या यही उनकी भक्ति है और बाबा के प्रवचन हैं?   क्या यही धर्म है और धर्म कि सीख? क्या यही खुद को इंसान कहने वालों कि इंसानियत है? क्या विनाश और अहिंसा ही इन धार्मिक लोगों का धर्म है? क्या यह काम भक्तों को शोभा देता है? ऐसा खुनी मंज़र देखकर क्या कोई कह सकता है कि यह बाबा के मासूम भक्त हैं या खरीदे हुए  गुंडें

 

यह अफ़सोस और शर्म तब और ज्यादा बड़ जाती है जब ध्यान इस बात पर चला जाता है कि आखिर हरियाणा कि BJP  या Khattar  सरकार इस विनाश भरे आक्रोश के माहौल को रोकने में नाकाम क्यों रही? विफल क्यों रहीएक आम आदमी जो कि विश्वास कर कर अपना वोट इन पोलिटिकल लीडर्स को डालता है कि जे लोग शान्ति या मुसीबत के समय  इनकी जान और संपत्ति कि रक्षा करेंगे अब कैसे और किस बात को सामने रखकर इनको वोट डालेगा? क्या इन लीडर्स की यह जिम्मेवारी नहीं रह जाती कि किस तरह आम आदमी के जीवन कि रक्षा कि जाए? कि कैसे इन्हें उपद्रविओं से बचाया जाए? खट्टर सरकार को कोर्ट द्वारा निर्देश जारी किये गए कि धरा 144 लागू कि जाए पर लागू क्यों नहीं कि गयी? आखिर इस खट्टर सरकार का बाबा राम रहीम से क्या टांका है कि यह धरा 144 लागू करने में पूरी तरह नाकामयाब रही?

 

आखिर कब हमारा देश इन पाखंडी, बलात्कारी, गुंडे  और मक्कार बाबाओं या नेताओं से मुक्त होगा और हर एक भारतीय एक नए, सुरक्षित, साफ़ और strong और upright  judiciary वाले भारत में रहेगा?  

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