बाबा नानक और उनके भटके सिख

बाबा नानक ने समाज को सही तरीके से जीने का ढंग दिया था, एक नयी और बुलंद विचारधारा दी थी, और जीवन में कैंसर की तरह घुस चुके अंधविश्वास और धर्म के नाम पर होती shameless लूट के बारे में आम लोगों को आम आदमी की तरह आम भाषा में महान ज्ञान दिया था पर अफ़सोस इस बात का है की आज वह सोच और ज्ञान हम सिखों में आहिस्ता आहिस्ता लुप्त होता जा रहा है। आज हम बाबा नानक के सिख नहीं रहे, आज हम rational और intellectual mind रखने वाले बाबा नानक के सिख नहीं रहे, हम तो बस डेरों, मढ़ी मसानों, और पाखंडी बाबों या महंतों के सिख बन के रह गए हैं! बाबा नानक के नक्शे कदम पर चलना हमे शोभा नहीं देता और न ही उनके द्वारा फैलाये पूरे world में धर्म और परमात्मा के सही ज्ञान को लोगो तक पहुंचाना हम अपना कर्त्तव्य समझते हैं।

आज हालत ऐसी बन चुकी है की जो ज्ञान और इंसानियत की विरासत बाबा नानक ने हमें दी थी हम आहिस्ता आहिस्ता उससे हाथ धोने लगे हैं। हमसे अच्छे तो वो non-Sikhs हैं जिन्होने बाबा नानक के महान ज्ञान को समझा और दिन रात इसी कोशिश में लगे हुए हैं की किसी तरह इस ज्ञान को पूरे संसार में बांटा जाये। आज का सिख वो पहले जैसा सिख नहीं रहा। आज का सिख बाबा नानक का सिख नहीं रहा। Birth हो या death, घर में कोई social function हो या मातम, promotion हो या demotion, बच्चा pass हो या fail, शादी successful हो या fail , नौकरी मिले या न मिले, घर में पैसा आये या न आये, संतान आज्ञाकारी हो या न हो, और तो और कोई भी ऐसा काम नहीं बचा जहाँ पर हम अंधविश्वास और डर में आकर पंडितों या बाबों और महंतों के पास न गए हों।

हर एक ऐसा काम जो बाबा नानक ने हम सबको करने से मना किया था वो आज हम बड़े शौक और आनंद से कर रहे हैं। जहां तक की अंद्विश्वास आज गुरुद्वारों में भी पहुँच चका है। जीवन में घुस चुकी परेशानीओं को open और rational mind से समझे बिना हम इनसे छुटकारा नहीं पा सकते और यह ज्ञान हमें बाबा नानक ने बहुत समय पहले दे दिया था। लालच, झूठी शान, परिवार और समाज के मोह, और power के नशे ने कुछ इस तरह से हमें mentally paralyzed कर दिया है की हमें बाबा नानक का ज्ञान बहुत छोटा और old लगता है। सचाई तो यह है की हम ज्ञान की torch को पकड़ना ही नहीं चाहते क्यूंकि हमें मालूम है की हम खुद अन्दर से इतने कमजोर और गिर चुके हैं।

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