बाबा गुरमीत राम रहीम और उनकी विलासमय जीवन शैली…

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बाबा राम रहीम, आसा राम बापू, नित्यानंद और इंदिरा गाँधी के समय मशहूर योग बाबा धीरेन्द्र ब्रह्मचारी और न जाने ऐसे कितने चालाक और मक्कार बाबा लोग हैं जिन्होंने पूरे हिंदुस्तान के  लोगों को धर्म  के नाम पर गुमराह किया हुआ है। ये ऐसे लोग हैं जिन्हें मेहनत और ईमानदारी कि कमाई से डर लगता है और बस बेले बेकार बैठ कर, बिना कुछ किये खाना, पैसा और शोहरत कमाने की आदत पड़ चुकी है। इन बाबा लोगों को अगर ये पूछ लिया जाए कि धर्म कि सही परिभाषा क्या है तो  यह नहीं बता पाएंगे। इन्हें यहाँ तक यह भी नहीं मालूम कि भगवान् एक है या दो हैं।  न जाने कहाँ कहाँ से शब्दों के जाल बुनना शुरू कर देते हैं और गोलमोल तरीके से अंधे भक्तों को भावनाओं के समुन्दर में डुबो देते हैं और वह समुन्दर दिन प्रति दिन और गहरा होता जाता है, जिसकी गहराई से बाद में  निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।

बाबा राम रहीम  का केस भी कुछ इतना ही रंगीन है जिसकी आप अपने दिमाग में कलपना भी नहीं कर पाएंगे। बाबा राम रहीम पूरे हिंदुस्तान में वो पहले   बाबा हैं  जो मॉडलिंग, एक्टिंग और गाने गाने का शौक़ रखते  हैं। ग्लैमरस लाइफ जीना तो इनकी  न छूटने वाली आदत बन चुकी है। और हाँ लड़कियों की संगत  करने से इन्हें कोई जाती और सामाजिक परहेज नहीं है। इनका सिर्फ यही मानना है कि ज़िन्दगी में जो दिल करता है वो करो। समाज कि बिलकुल भी परवाह न करो।

इन्हीं के डेरे में से निकली हुई एक साध्वी ने इन पर संगीन इल्जाम लगाया कि बाबा राम रहीम ने इनका शारीरिक शोषण किया और साथ में डराया धमकाया भी कि अगर अपना मुहं किसी के सामने खोला तो इसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। ऐसा ही इल्जाम कुछ समय पहले आसा राम बापू और उनके बेटे पर भी लगाया गया था जो कि आज जेल कि हवा खा रहे हैं। कहते हैं जहां धुंआ है वहाँ आग पक्का लगी होती है  – कुछ न कुछ तो  हुआ होगा जिसकी वजह से उस साध्वी ने इतना बड़ा इल्जाम बाबा पर लगाया।

बाबा राम रहीम और इन जैसे जितने भी बाबा हिंदुस्तान या दुनिया के किसी भी कोने में रहते हैं इन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने का पूरा अधिकार और हक़ है, इनका जो भी दिल करता है ये करें , मॉडलिंग हो या फिल्में बनाना, BMW में घूमें या अपने private chopper में, लड़कियों के साथ अधनंग घूमे या कहीं भी जाएँ पर आपके बाबा होने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप मेहनत और रोज़ी रोटी कमाना छोड़कर, अपने खोखले और दिखावी ज्ञान से मासूम, भोले भाले और दुखों में डूबे लोगों को चटपटी और जल्दी प्रभावित करने वाली बातें कर कर उन्हें अंधभक्ति, अंधश्रद्धा और डर से बीमार कर दें! और फिर उनके पैसों के बल पर आप गुलछर्रे उड़ाना शुरू कर दें, आप रंगीन और विलासमय ज़िन्दगी जीना शुरू कर दें, आप अपने मानसिक तल पर दबे हुए शोक पूरे करना शुरू कर दें और फिर बाद में जिन अंधभक्तों ने आप को ऊपर उठाया था उन्हें ही नज़रें दिखाना या उनका ही शोषण करना शुरू कर दें!

एक सही और सच्चा बाबा इन सब बातों से दूर रहता है क्यूंकि उसे मालुम होता है कि ये सब दुनियावी पुलाव हैं जिनका स्वाद पूरी उम्र नहीं रहता। उसे तो सिर्फ यही मालूम है कि भगवान्, ईमानदारी, साधापन  और सचाई के साथ कैसे रहा और जुड़ा जा सकता है।

यहाँ मुझे गुरबाणी की एक महान पंक्ति याद आ गयी जो साफ़ साफ़ इन बाबाओं कि रास लीलाओं पर इशारा करती है।

ਅਨਕ ਭੋਗ ਭਿਖਿਆ ਕੇ ਕਰੈ। ਨੈਹ ਤ੍ਰਿਪਤਾਵੈ ਖੱਪ ਖੱਪ ਮਰੈ।

English Translation: One may enjoy all sorts of corrupt pleasures, but one is still not satisfied. One indulges again and again, wearing out himself, until one dies.

 

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