कश्मीर के नाम…

इक तरफ कश्मीर के नजारे हैं, दूसरी तरफ मर  रहे जवान  हमारे हैं।

अखबारें  देख  लगता  है  जैसे चलती फिरती मज़ारें हैं।

यह कैसे शहीद वो कैसा जिहाद, जो इंसानों का खून  बहा रहे हैं,

यह कैसा धर्म  निभा रहे हैं?  चाहे  इधर मरें  या उधर, दोनों तरफ भाई  हमारे हैं ।

यह कैसी ज़मीनें यह कैसे किनारे हैं, जिसने आज तक बसे घर उजाड़े हैं,

जो मामा भाई  थे किसी  के वो बन गए अब सितारें हैं।

बुन रही  थी  सेहरा और ख्वाब  डोली  के, वो कैसे सहेगी निशाँ बेटे के सीने  पे गोली  के।

यह झगड़े, यह हथ्यार  देश  की गरीबी और बढ़ा  रहे हैं,  जहाँ  थे घर कभी, अब बस  खड़ी दीवारें  हैं।

रोती  होंगी नदियाँ  बैठ पहाड़ की गोद  में, और सोचती होंगी यह झगड़े वो करवा  रहे हैं।  

हम खून बहाना कब  बंद करेंगे, अब तो यह नज़ारे भी  शौक  मना  रहे हैं?

 

Penned By: Roohdaar…

Contact the writer at: roohdaar99@gmail.com

lifepotter.com immensely appreciates and feels indebted to ‘Roohdaar’ for sharing his valuable literary contribution. We wish him a grand success and best wishes towards his literary career. His earlier writings in the form of poems and articles have already been an unstoppable sensation among Indian youth and which also earned him great applaud.

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