एक वक़्त ऐसा भी था…

एक वक़्त ऐसा भी था…

एक वक़्त ऐसा भी था जब पैसा न था पर इज़्ज़त बहुत थी और आज पैसा बहुत है पर इज़्ज़त दो टक्के की भी नहीं है।

एक वक़्त ऐसा भी था जब एक कमाता था और चार खाते थे और आज चार कमाते हैं पर फिर भी एक भी ढंग से नहीं खा पाता है।

एक वक़्त ऐसा भी था जब मंदिर, गुरुद्वारे कम थे पर श्रद्धा बहुत थी और आज मंदिर, गुरुद्वारे बहुत हैं पर श्रद्धा न के बराबर।

एक वक़्त ऐसा भी था जब लड़कियां बिना चारदीवारी के भी सुरक्षित थी और आज अपने ही घरों में वे सुरक्षित नहीं हैं।

एक वक़्त ऐसा भी था जब बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और उनकी सेवा करना एक महान काम होता था और आज बुजुर्ग old age homes में किसी कोने में सड़ रहे हैं।

एक वक़्त ऐसा भी था जब सूखी खा कर भी होटल जैसा स्वाद आता था और आज होटल में महान से महान पकवान खा कर भी वो सूखी रोटी जैसा स्वाद नहीं बन पाता।

एक वक़्त ऐसा भी था जब एक ही घर में प्यार से ओतप्रोत होकर सारा मोहल्ला इकठा हो जाता था और आज मोहल्ले को छोडो, एक आदमी भी किसी के घर में नहीं जा पाता।

एक वक़्त ऐसा भी था जब मेहमान या रिश्तेदार के आने पर मन फूला न समाता था और आज दरवाजे की घंटी सुनते ही मन काँप जाता है कि कोई आ तो नी गया।

एक वक़्त ऐसा भी था जब टूटे फूटे बिस्तर पर भी नींद मीठी आती थी और आज मखमल के गद्दों पर आँख भी नहीं लग पाती।

एक वक़्त ऐसा भी था जब जेब में एक रूपया होता था पर दिल राजों जैसा होता था और आज जेब में करोड़ों रूपए हैं पर दिल भिखारिओ जैसा हो गया है।

एक वक़्त ऐसा भी था जब घर की बातें पड़ोसियों से बिना किसी डर या शर्म के कर ली जाती थी और आज वही पडोसी दुश्मन से जान पड़ते हैं।

एक वक़्त ऐसा भी था जब नमक, मिर्ची के लिए अक्सर पास में चले जाते थे और आज पास में मौत होने पर भी किसी के घर नहीं जा पाते।

एक वक़्त ऐसा भी था जब कार या मोटरसाइकिल के न होने पर भी रिश्तेदारों के घर घूम आते थे और आज सभ कुछ होने पर भी जाने का दिल नहीं करता।

एक वक़्त ऐसा भी था जब मोमबत्ती में भी बच्चे पढ़ लिया करते थे और आज generator और inverter के होने पर भी किताब नहीं खुल पाती।

एक वक़्त ऐसा भी था जब mobiles न थे पर फिर भी किसी न किसी तरह सुख दुःख पूछ लिया करते थे और आज नमस्ते और हैल्लो भी नहीं कह पाते।

एक वक़्त ऐसा भी था जब सड़क पर पड़े डिब्बों या माचिस की खाली डिब्बिओं से खेलने का भी अपना ही मजा था और आज video games और न जाने क्या क्या होने पर भी मन खुश नहीं हो पाता।

एक वक़्त ऐसा भी था जब peon या driver की नौकरी करते हुए भी घर का गुजारा चल जाता था और आज अफसर बन कर भी घर चलाना मुश्किल सा लगता है।

एक वक़्त ऐसा भी था जब झौंपडिओं में रहते हुए भी सुख चैन था और आज आलिशान महलों में भी हंसी के दो पल भी नहीं मिल पाते।

एक वक़्त ऐसा भी था school result का बहुत लम्बा इंतज़ार करने पर कम marks आने पर भी खुश हो जाते थे और आज मोबाइल के एक ही क्लिक पर रोल नंबर डालने पर 95 % दिखने पर भी वो ख़ुशी नहीं आ पाती।

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